Friday, June 8, 2018
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कितने सेब?-Motivational Story Hindi

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Motivational Story Hindi:एक टीचर एक बच्चे को maths पढ़ा रहे थे।उस टीचर ने उस बच्चे से पूछा “अगर में तुम्हे एक सेब दू,फिर एक और सेब दू फिर एक और सेब दू तो तुम्हारे पास टोटल कितने सेब हो जायेंगे?”

उस बच्चे ने कुछ देर तक सोचा और अपने उंगकियो पर गिनने लगा।कुछ देर में उसने उत्तर दिया “चार”.

यह सुन टीचर थोड़े निराश हो गए,टीचर मन में सोचने लगे यह तो कोई भी बता सकता था।शायद बच्चे ने अच्छे से सुना नहीं।

और एक बार फिर उस टीचर ने उस बच्ची से वही प्रश्न किया “ध्यान से सुनो- अगर में एक सेब तुम्हें दू,एक और सेब दू,और एक आखरी सेब दू तब तुम्हारे पास कितने सेब हो जायेंगे?”

Motivational Story Hindi
Motivational Story Hindi

वह बच्चा टीचर जी का चेहरा देखके समझ चुका था की टीचर जी उसके उत्तर से ख़ुश नहीं है इसलिए वह फिर से सोचते हुये अपनी उंगलियों पर गिनती करने लगा और यह भी सोचने लगा की टीचर जी को ऐसा क्या बताऊँ की टीचर जी खुश हो जाये।अब उसके दिमाग में ये नहीं था कि उत्तर सही हो बस यही था कि टीचर जी खुश हो जाये।

पर अन्ततः बहुत देर तक सोचने के बाद उसने फिर वही उतार दिया “टीचर जी चार”

एक बार फिर से टीचर जी निराश हो गए।टीचर जी को अचानक से याद आया की बच्चे को आम बोहोत पसंद है शायद बच्चे को सेब पसंद ना होने के कारण वह अपना focus loose कर दे रहा हो।

अब टीचर जी ने फिर से प्रश्न किया “ये बतावो अगर में तुम्हे एक आम दू,फिर एक आम दू और एक आखरी आम दू तब तुम्हारे पास कितने आम हो जायेंगे?”

बच्चे ने अपनी उंगलियों पर गिनती करते हुए बोला “तीन”.

यह सुन टीचर जी ख़ुश हो गए।उनका तरीका काम कर गया था।टीचर को लगा की अब बच्चा समझ चूका है और अब वो किसी भो प्रश्न का उत्तर दे सकता है।

अब फिर से पहला वाला प्रश्न दोहराते हुए टीचर ने कहा “अच्छा बेटा अब बतावो,में तुम्हें एक सेब दू,फिर एक और सेब दू और एक आखरी सेब दू तब तुम्हारे पास कुल कितने सेब हो जायेंगे?”

पिछला प्रश्न सही पड़ने के कारण उसका आत्मविस्वाश बढ़ चूका था इसलिए वह झट से बोला “चार”

यह सुन टीचर जी बड़े क्रोधित हो उठे और क्रोध में बोले “तुम्हारे पास दिमाग नहीं है क्या…जरा मुझे भी बताओ कि चार सेब कैसे हुये?”

टीचर को क्रोदित देख बच्चा डर गया और टूटते हुए आवाज़ में बोला “क्योंकि मेरे बेग में पहले से एक सेब है।”

दोस्तों, कई बार ऐसा होता है कि सामने वाले का जवाब हमारे अनुकूल नहीं होता।उस वक़्त हम अपना temper loose कर बैठते है।दोस्तों जरुरत इस बात की है कि उसके इस उत्तर देने के पीछे उसके logic को समझे।भीन-भीन माहौल में पले बड़े होने के कारण सबका देखने और उसका उत्तर देने का वजह अलग अलग होता है।इसलिए अगली बार जब आपको किसी प्रश्न का उत्तर अटपटा मिले तो उस पर क्रोधित होने के बजाय उस आदमी के उत्तर देने के कारण पूछे।और यह भी सोच लीजियेगा की कही ऐसा तो नहीं की आप भी उस छुपे हुए सेब को नहीं देख पा रहे है।


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Love vs Attraction In Hindi-Love & Attraction Difference

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Love vs Attraction In Hindi:दोस्तों जिंदंगी के इस सुहाने सफर में कई ऐसे लोग हमसे टकराते है जिस से हम मिलकर समझ नही पाते कि हमे सामने वाले से love है या फिर बस हमारा उनकी तरफ attraction है।

दोस्तो में अपने नजरिये से और अपने तरीके से explain करू तो love का सीधा अर्थ होता है sacrifice मतलब की त्याग।जिसमें हमारा कोई स्वार्थ नही होता।Example के लिए लिया जाए तो जैसे कि हिमारे माता पिता हमारी छोटी छोटी इच्छओं को पूरा करने के लिए अपनी इच्छओं को त्याग देते है।वो बस चाहते है कि बस मेरा बेटा या बेटी हमेशा खुश रहे।वो हमें हमेशा खुश देखना चाहते है।वो हमें हमेशा मुस्कुराता हुआ देखना चाहते है।प्यार एक ऐसा एहसास है जिसमे सामने वाले कि भावनाओ का कदर किया जाता है उसके भावनाओ का दिल से सम्मान किया जाता है।प्यार मे इंसान सुख दुःख में साथ मे खड़ा रहता है।प्यार में कोई स्वार्थ नही होता।हम अपनी सारी खुशी त्याग कर बस सामने वाले को खुश देखना चाहते है।

Love vs Attraction In Hindi
Love vs Attraction In Hindi
चलिये हम बचपन की ही बात कर लेते है।जब कभी हम गलतियां करते थे तब हमें माता पिता समझाते थे, डाँटते थे कभी कभी तो पीटते भी थे औऱ कई बार तो हमे खाना भी नही मिलता था तब मम्मी आती थी और चुपके से हमे हमारी गलतियों को भूल कर प्यार से खाना खिलाती थी।बिल्कुल इसी को हम प्यार कहते है।

 

प्यार में सामने वाले कि गलती होते हुये भी माफ कर देते है।आपने देखा होगा कि भले बेटा चोर हो डाकू हो जुवारी हो पर इसके बावजूद उसके माता पिता उस से प्यार ही करते है।इस तरह कोई प्रेमी ये नहीं देखता की सामने वाला कैसा है।कहा जाता है ना कि प्यार अंधा होता है।दोस्तो ये बात 101% सही है।प्यार में कोई यह नही देखता कि सामने वाला इंसान कैसा है।Actully ये गलत है भावजुत दोस्तो प्यार तो प्यार होता है।

 

वही अब बात करते है हम attraction की।वही attraction विल्कुल अलग होता है।इस मे कोई sacrifice नही होता इस मे खाली कुछ पाने की चाह होती है,इस मे अपना लाभ होता है।attraction में इंसान को कुछ पाने की चाह होती है ये चाह किसी भी प्रकार की हो सकती है जैसे के सामने वाले कि खूबसूरती, physical हो सकता है,अकेलापन  का भरने का हो सकता है और भी बहुत से attraction हो सकते है।attraction में इंसान अपनी खुशी देखता है।में इश्को अच्छे से समझाने के लिए एक छोटा सा example देता हूँ।

 

मान लीजिए आपने आपने अपने घर मे एक पौधा लगाया और उसके कुछ दिन बाद उस पर एक फूल आया।वो फूल आपको अच्छा लगा और आपने उसे तोड़ कर अपने पास रख लिया।आपको पता है ये क्या है?दोस्तो इसी को हम attraction कहते है।कैसे?दोस्तो थोड़ी देर के लिए सोचिए वो फूल क्या हमेशा इस ही तरह रहेगा?क्या वो हमेशा उसी तरह खुश्बू देता रहेगा?नही ये सिर्फ कुछ देर के लिए रहेगा।

 

अब हम इस फूल के दूसरे पहलू को देखते है।थोड़ा और पीछे चलते है। आपको फूल पसंद आया।आपको  वो अच्छा लगा।अब आप उसको तोड़ेंगे नही बल्कि उस फूल का ध्यान रखेंगे।उस टाइम पर पानी देंगे, खाद डालेंगे, उसकी देख रेख रखेंगे ताकि वो जल्दी सुख न जाये और हमेशा उसे खिला हुआ और खुशबू बिखेरता हुआ देख सके।

 

दोस्तो यही छोटी सी बात आज की genertion समझ नही पा रही और attraction को लव समझ कर बहुत बड़ा नुकसान कर रही है।दोस्तो अगर आप किसी relationship में रहते हुए आपको bore फील हो रहा है तो दोस्तो वो बिल्कुल ही attraction है।क्योंकि सच यही है कि आप जिस इंसान से प्यार करते है उस के साथ कभी आप बोर हो ही नही सकते।

 

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क्या हमारे माता-पिता हमे आगे बढ़ने से रोक रहे है-Motivational Story In Hindi

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क्या हमारे माता-पिता हमे आगे बढ़ने से रोक रहे है-Motivational Story In Hindi:हमारे माता-पिता… दोस्तो हमारे माता पिता हमें हमारे बहुत से कम में रोक टोक करते रहते है।ये मत करो,वो मत करो,यहा मत जाओ,वहा मत जाओ,एशा मत करो वैसा मत करो और भी बोहोत चीज़ों में हमे बोलते रहते है।वे हमें अक्सर किसी न किसी काम मे रोक टोक करते रहते है।तो दोस्तो क्या आपको नही लगता कि ऐसा करके हमारे माता पिता हमे आगे बढ़ने से रोक रहे है??

 

चलिये हम इश्का फैसला बाद में करेंगे।उसके पहले में आपको एक छोटी सी कहानी सुनाता हूँ।

 

एक बार की बात है एक पिता अपने सात साल के बेटे के साथ पतंग उड़ा रहे थे।पतंग काफी उचाई छू रही थी।वो लगभग बदलो को छूती हुई हवा के साथ लहरा रही थी।कुछ समय बाद बेटा पिता से बोला “पापा हमारी पतंग धागे की वजह से ऊपर नही जा रही हमे इस धागे को तोड़ देना चाहिए। इशके टूटते ही हमारी पतंग ऊपर चली जाएगी।

 

पिता ने तुरन्त ऐसा ही किया।उन्होंने धागे को तोड़ दिया।फिर कुछ ही देर में पतंग और ऊपर जाने लगी। पुत्र के चेहरे पर खुशी दिखाई दी पर ये खुशी कुछ पल के लिए ही थी क्योंकि वह पतंग थोड़ी ऊपर जाने के बाद खुद ब खुद नीचे आने लगी और कही दूर जमीन पर आके गिर गयी।

 

क्या हमारे माता-पिता हमे आगे बढ़ने से रोक रहे है-Motivational Story In Hindi
Motivational Story In Hindi
यह देख पिताने बेटे को कहा “पुत्र जिंदगी की जिस उचाई पर हम है वहा से हमे अक्सर लगता है कि कुछ चीजें जिस से हम बंधे हुये है वो हमें उचाईयों पर जाने से रोक रही है।जैसे कि हमारे माता,पिता,अनुसासन,हमारा परिवार आदि।इसलिए हम कई बार सोचते है कि शायद में इसी वजह से sucess नही हो रहा।मुझे इस से आजाद होना चाहिए।

 

जिस प्रकार से वह पतंग उस धागे से बंधी हुई रहती है उसी तरह से हम भी इन रिस्तो से बंधे हुये हैlवास्तव में यही वो धागा होता है जो पतंग को उचाईयों पर ले जाता है ।हाँ जरूर तुम ये धागा तोड़ के यानी की अपने रिश्ते तोड़ के उचाईयों को छू सकते हो लेकिन उस पतंग की तरह ही कभी ना कभी कट कर नीचे गिर जाओगे।

 

पतंग तब तक उचाईयों को छूती रंहेंगी जब तक पतंग उस डोर से बंधी रंहेंगी।ठीक इसी तरह से हम जब तक इन रिश्तों से बंधे रंहेंगे तब तक हम उचाईयों को छूते रंहेंगे।क्योंकि हमारे जीवन मे सफलता रिश्तों के संतुलन से मिलती है।

 

दोस्तों इस कहानी से में बस आपको यही समझना चाहता हूँ कि हमारे माता पिता हमे आगे बढ़ने से बिल्कुल रोक नही रहे बस वो रोक टोक करके उस धागे को टूटने से बचाना चाहते है।क्योंकि वो जानते है कि आप इस धागे को तोड़ के उचाईयों को नही छू सकते।

 

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खुसिया बाँटने से बढाती है-Hindi Motivational Story

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खुसिया बाँटने से बढाती है हिंदी मोटिवेशनल स्टोरी-Khusiya Batne Se Badhati Hai Hindi Motivational Story:एल मनीष नाम का लड़का था।मनीष बैंक मे सरकारी अफसर था।वह रोज अपनी बाइक से सुबह ऑफिस जाता और शाम को लोट आता था।शहर में चका चोन्द तो बहुत थी लेकिन जीवन कही सिकुड़ सा गया था।आत्मीयता की भावना किसी में तो कही थी ही नहीं बस हर इंसान व्यस्त है अपनी लाइफ मे,यही सोचता सोचता मनीष घर जा रहा था।

एक दिन शाम को मनीष अपनी बाइक पर सवार हो कर घर की ओर जा रहा था।फुटपाथ पर एक छोटी सी डलिया लिए उसको एक बूढ़ी अम्मा दिखाई दी शायद कुछ बेच रही थी।मनीष उसके पास गया तो उसने देखा की वह बृद्ध अम्मा छोटी सी डलिया में संतरे बेच रही थी।

खुसिया बाँटने से बढाती है-Hindi Motivational Story
खुसिया बाँटने से बढाती है-Hindi Motivational Story

मनीष मन ही मन सोचने लगा देखो कैसा जमाना आ गया।लोग बड़े बड़े मॉल में जा कर महंगे महेंगे सामान ख़रीदना पसंद करते है।कोई इस बेचारी की तरफ देख भी नहीं रह।

मनीष अपनी बाइक साइड में रख कर बुढ़िया के पास गया और बोला “अम्मा एक किलो संतरे तोलना।”

बूढ़ी अम्मा उसे देख कर आँखों में चमक सी आयी।वह जल्दी से संतरे तोलने लगी।फिर पैसे देने के बाद मनीष ने एक संतरा अपनी थैली से निकला और खाते हुए बोला “अम्मा संतरे तो मिठे नहीं है।”ऐसा कहते हुए उसने एक संतरा बूढी अम्मा को थमा दिया।

फिर उस बुढ़िया ने संतरा चखा और बोली “मिठे तो है बाबु।” फिर मनीष बिना कुछ बोले अपना थैला लेके आगे की और चल दिया।

अब ये रोज का क्रम बन गया।मनीष रोज संतरे उस बुढ़िया से लेता और एक संतरा थैली से निकाल कर अम्मा संतरे मीठे नहीं है कह कर उस बुढ़िया को दे देता।वह बुढ़िया संतरे चख कर कहती मीठे तो है बाबु,फिर मनीष अपनी थैली उठा कर चल देता।कई बार मनीष के साथ उसकी बीवी भी होती।वो यह सब देख कर आश्चर्यचकित होती थी।एक दिन उसने मानिस से पूछा-“सुनो जी,आप रोज उस बुढ़िया से संतरे लेते हो औऱ संतरे इतने मीठे भी होते है फिर भी तुम क्यों उस बिचारी के संतरे की बुराई करते हो।”

यह सुन मनीष बोला “तुम सही कह रही हो उस बूढ़ी अम्मा के सारे संतरे मीठे ही होते है।पर बिचारी कभी खुद उन संतरो को नहीं खाती।मे तो बस इस इसलिए करता हु की वह माँ मेरे थैले मे से एक संतरा खाले और उसका नुकसान भी ना हो।

उसके रोज का ये क्रम पास ही बेठी गंगू भी देखती थी।उसने एक दिन उस बुढ़िया से पूछ ही लिया -“अरे, ये लड़का रोज संतरे लेने में कितना चिक चिक करता है।तुझे कितना परेसान करता है फिर भी मई देखती हूं कि तू रोज उसको एक संतरा फालतू तोलती है।ऐसा क्यों?

यह सुन बुढ़िया बोली “गंगू,वो लड़का मेरे संतरे की बुराई नहीं करता बलिकी वो रोज मुझे एक संतरा खिलाता है और उसे लगता है कि मुझे कुछ पता ही नहीं है।उसका इतना प्यार देखके पने आप ही उसके थैली में एक संतरा फालतू ही चला जाता है।

दोस्तों,विस्वास मानिये कभी कभी इन छोटी छोटी बातों में बहुत ही आनंद भरा होता है।दोस्तों खुशियां पैसे से नहीं खरीदी जा सकती,दुसरो के प्रति प्रेम की भावना जिंदगी में मिठास घोल देती है।और एक बात और दोस्तों “देने में जो सुख है वो लेने मे नहीं।हमेशा याद रखिए दोस्तों खुशिया बाटने से बढाती है।

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अपनों के जाने का गम-Hindi Heart Touching Story

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अपनों के जाने का गम-Hindi Heart Touching Story:एक परिवार मे एक पिता उसकी पांच साल की बेटी मिनी से बहुत प्यार करता था।वह हमेशा ऑफिस से लौटते हुए उसके लिए तरह तरह के खिलौने और खाने पीने की चीज़े लाया करता था।उसकी बेटी भी पिता से खूब लगाव रखती थी।हमेशा आपने तोतली आवाज़ में पाप पाप करके बुलाया करती थी।

एक दिन मिनी को बहुत तेज बुखार आया।परिवार का हर सदश्य परेसान हो गया और उसको जल्दी से होस्पिटल ले जाया गया।पर डॉक्टर उसकी जान बचा न सके और मिनी की मृत्यु हो गयी।

अपनों के जाने का गम-Hindi Heart Touching Story
अपनों के जाने का गम-Hindi Heart Touching Story

यह सुन परिवार पर तो पहाड़ सा टूट पड़ा।पिता के दुःख का तो ठिकाना नहीं रहा वह फुट फुट कर रोने लगे।पुरे घर पर मातम सा छा गया।महीनो तक पिता एक कोने में बैठ कर रोया करते और किसी से भी बात नहीं करते।यहाँ तक की उन्होंने ऑफिस जाना तक बंद कर दिया।

उनके अडोस पड़ोस वाले सगै संबधियों उनको कितना समजाया पर वह न कुछ खाते ना पीते बस हमेशा रट ही रहते।उनके मुख से एक ही शब्द निकलता मिनी।

एक दिन पिता मिनी के बारे में सोच रहे थे की उनकी आँख लग गयी।और उनको उसी समय सपना आया।उन्होंने सपने में देखा की स्वर्ग में कई लड़कियाँ अच्छे अच्छे कपडे पहनकर घूम रही है और सबके हाथ में मोमबत्ती है।उन्होंने देखा की वहा उनकी बेटी मिनी भी है।मिनी ने भी अछि dress पहनी थी पर उसके हाथ में जो मोमबत्ती थी वह बुझी हुयी थी।यह देख पिता उसके पास गए और बोले “बति मिनी सबकी मोमबतियां जल रही है,तुमहारी क्यों बुझी है?तुम इसे जला क्यों नहीं लेती?”

मिनी ने कहा “पाप जलती तो हु पर मेरे पापा इतना रोते है कि उनके आँसुओ से मोमबत्ती आपने आप बुज़ जाती है।”

इतना सुनते है पिता की आँख खुल गयी और वह समझ गए की उनके इतना रोने से उनकी बेटी भी खुश नहीं है।और धीरे धीरे वह अपनी खुसहाल जिंदगी की और बढ़ने लगे।

दोस्तों,दोस्ती हम जिसे प्यार करते है उनके जाने का गम शब्दो से बया नहीं किया जा सकता।पर कही न कही हमे अपने आपको मजबूत करना होता है.और अपनी जिमेदारियों को निभाना होता है.और शायद एसा करना ही मरने वाले की आत्मा क शांति देता है.इसमे कोई संदेह नहीं है की हमे चाहने वाले हमे खुश देखना चाहते है अपने मरने के बाद भी.

 

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असंभव कुछ भी नहीं हिंदी प्रेरनादायी कहानी

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असंभव कुछ भी नहीं हिंदी कहानी -Nothing is Impossible:किसी राज्य में एक राजा था।उस राजा के दो पुत्र थे-अमित औऱ विक्रम।दोनों भाई एक दूसरे से बहुत लगाव रखते थे।एक दिन दोनों जंगल में शिकार करने गए।रास्ते में चलते चलते एक नदी आयी।दोनों राजकुमारों का मन हुआ की चलो इस नदी में नहाया जाये।

फिर वह दोनों नदी के अंदर उतर गए।नदी उनकी अपेक्षा से काफी गहरी थी।अमित तैरते तैरते कुछ दूर तक निकल गया।अभी थोड़ा तैरना शरू ही किया था कि एक जोर की पानी की लहर आयी और अमित को अपने साथ दूर तक ले गयी।अमित डर से अपनी सुध बुद खो बैठा।गहरे पानी में उससे तैरा नहीं जा रहा था।अब तो वह डूबने लगा था।

असंभव कुछ भी नहीं-Nothing is Impossible
असंभव कुछ भी नहीं-Nothing is Impossible

अपने भाई को बुरी तरह फसा देख विक्रम जल्दी से पानी के बहार निकला।और जल्दी से एक लकड़ी का गट्ठा अमित की और उछाला।परंतु दुर्भाग्यवा अमित इतना दूर था कि लकड़ी का गट्ठा उसके हाथ नहीं आ रहा था।

अब तो विक्रम परेसान हो उठा।कुछ देर बाद कुछ गांव वाले वह पहुचे और राजकुमार को देख सभी बोलने लगे “अब तो राजकुमार को बचाना नामुमकिन है।अब राजकुमार नहीं बच पायंगे।”यह सुन अब विक्रम को भी लगने लगा था अब उसका भाई अमित नहीं बच सकता।तेज बहाव में बचना नामुमकिन है ऐसा सोच कर सभी ने अपने हथियार डाल दिये और कोई बचाव के लिए आगे नहीं आया।

अभी सभी लोग नदी के किनारे बैठ अमित का शोक मन राहर थे तभी उनको दूर से एक सन्यासी आते हुए नज़र आये।साथ में एक नोजवान भी दिखाई दे रहा था।पास आये तो पता चला की वो अमित था।अब तो सब खुश हो गए और सब अच्चार्यचकित हो उठे।सब बड़े ही आश्चर्य से अमित से पूछने लगे अरे तुम इतने तेज बहाव में बचे कैसे?

यह सुन सन्यासी बोले-“आपके इस सवाल का जवाब में देता हूं।वह बच पाया क्योंकि उसे वह यह कहने वाला नहीं था कि यहाँ से बचना नामुमकिन है,इसे कोई हतास करने वाला नहीं था।इशके सामने तो बस लकड़ी के वो गट्ठर था और बचने की एक उमीद बीएस इसलिए ये बच निकला।

दोस्ती,हमारे साथ भी ऐसा ही होता है।जब कोई कहने लगता है कि यह असम्भव है तब हम भी अपने हथियार डाल देते है क्योंकि हम भी मन लेते है कि यह असंभव है।हम अपनी क्षमताओ का आकलन दुसरो के कहने से करते है।जैसे की कभी कोई टोपर किसी exam में फ़ैल हो जाता है तब हम ऐसी बाते करते है:-

अरे जब टोपर छात्र से पेपर नहीं निकला तो हम कैसे निकालेंगे।
कोई बोलता है अरे इतना आसान नहीं है जितना तुम समझ रहे हो।
कोई बोलता है ये तुम्हारे बीएस की बात नहीं।
ये exam तो इतना कठिन है कि अच्छे अच्छे लोग इसे पार नहीं कर सकते तुम क्या पार करोगे।

और ये सब बातें सुन कर और देखकर हम अपने खुद की skill का उपयोग ही नहीं कर पाते।हम मन लेते है कि हम नहीं कर सकते।दोस्तों इस कहानी का तात्पर्य है कि आपके अंदर अपार क्षमताये है,किसी के कहने से आपने आपको कमजोर मत मानिये।

सोचिये अगर कोई विक्रम से यह बात बार बार कहता तुम यहाँ से नहीं निकल सकते,यहाँ से निकलना नामुमकिन है,ये अस्मम्भव है तो क्या वह निकल पता?कभी नहीं मेरे दोस्तों,उसने खुद पर विस्वास रखा खुद पे उमीद थी बस उसी उमीद से वह बच पाया।

 

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समोसे वाला रामू-प्रेरक प्रसंग हिंदी कहानी

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समोसे वाला रामू-प्रेरक प्रसंग हिंदी कहानी :किसी गाँव में एक गरीब किसान रामु रहता था।पिता की चौथी संतान था,ना तो सही से पालन पोषण हुवा और नाही अच्छी शिक्षा मिली।हाँ, पर रामु को एक काम बहुत ही अच्छा आता था,वो था समोसे बनाना।वह समोसे इतने स्वादिष्ट बनाता की खाने वाले उंगलिया चाटते रह जाते।

समोसे वाला रामू-प्रेरक प्रसंग हिंदी कहानी
समोसे वाला रामू-प्रेरक प्रसंग हिंदी कहानी

इसी वजह से लोगों की सलाह लेकर रामु ने एक दुकान खोली।अब क्योंकि रामु स्वादिष्ट समोसे बनाता था इसलिए उसकी दुकान चल पड़ी।रामु दिन पर दिन तरकी करने लगा।अब तो रामु ने नोकर चाकर भी रख लिए।रामु daily समोसे का आर्डर बढ़ा देता क्योंकि रोज समोसे की सेल बढती जा रही थी।एक दिन ऐसा भी आया की रामु पुरे शहर में सबसे ज्यादा आलू खरीदने वाला व्यकति बन गया।

रामू रेडियो पर समाचार नहीं सुन पता क्योंकि वह कान से बहरा था।और बिचार पढ़ा लिखा ना होने की वजह से अख़बार भी नहीं पढ़ पता था,और टीवी तो उसके पास था ही नहीं।

रामु की दुकान अच्छी चल रही थी इसलिए उसने अपने बेटे को भी अपने साथ दुकान पर रख लिया जो हॉस्टल में रह कर पढाई कर रहा था।

एक दिन रामु ने पिताजी से कहा “पिताजी टीवी,अख़बार मे खबरे आ रही है कि आर्थिक मंदी आने वाली है इसलिए क्यों ना आलू की डिमांड कम कर दी जाये और जो पैसे ही उन्हें बचाये जाये।

रामु को लगा की बेटा पढ़ा लिखा है सब जनता है और फिर रामु ने आलू की डिमांड कम कर दी।

अब धीरे धीरे धंधा भी कम होने लगा क्योंकि आलू ही काम आते थे।रामु ने आर्थिक मंदी के डर से आलू की डिमांड और कम कर दी।अब तो धीरे धीरे रामु की दुकान बंद आने के कगार पर आ गयी।

अब रामु ने अपने बेटे से कहा “बेटा तूने सही कहा था सचमुच आर्थिक मंदी से हमारा धंधा ही बंद हो गया।”

दोस्तों,हम लोग भी तो कुछ कुछ रामु की तरह ही है।जब तक हम अपने लक्ष्य पर फोकस करते है तब तक हमे सफल(success) होते रहते है लेकिन जैसे ही हम समस्याओ के बारे में सुनते है या फिर हमारे सामने कोई परेसानी आती है तब हमारा फोकस लक्ष्य पर कम परन्तु समस्या पर ज्यादा होता है।अगर आप परेशानि देखेंगे तो हर जगह परेशानिया ही नज़र आएगी।समस्या तो हर काम में आता ही है।अगर समस्या पर ध्यान केंद्रित करेंगे तो समस्या आप पर हावी हो जायँगी और आप अपने लक्ष्य से भटक जायेंगे।दोस्तों,अर्जुन की तरह बस लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कीजिये और आपको भर्मित करने वाले लोगों से बचिये।अपने दिशा में आगे की और बढ़ते जाइये आपको कामयाबी जरूर मिलेगी।

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नदी का पानी हिंदी प्रेरक कहानी-Nadi Ka Pani Hindi Kahani

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नदी का पानी-हिंदी प्रेरक कथा कहानी:बहुत समय पहले की बात है।किसी गाँव में भोला नाम का एक व्यक्ति रहता था।वह खेतो में खेती करता और खेत के उगे हुए अन्न से ही उसके परिवार का गुजारा चलता था।भोलाने बचपन से ही गरीबी का सामना किया था क्योंकि उसके माता पिता बी बेहद ही गरीब थे।

दिन ऐसे ही बतते जा रहे थे और अब बचे भी बड़े हो गए थे।अब तो उनकी पढाई का खर्च और ऊपर से यह महगाई।भोला हमेशा सोचता जीवन कितना कठिन है!एक परेसानी खत्म नहीं होती की दुसरो परेसानी शरू हो जाती है।पूरा जीवन इन परेशानियों को हल करने में है गुजर जा रहा है।

नदी का पानी-हिंदी प्रेरक कहानी
नदी का पानी-हिंदी प्रेरक कथा

एक दिन भोला किसी सड़क से गुजर रहा था तभी उसको एक साधु महाराज दिखाई दिए।भोला ने सोचा क्यों ना साधु महाराज के पास जाकर अपनी परेशानियों से बाहर निकलने का समाधान लिया जाये? यही सोच कर भोला उनके पास जाकर अपनी परेशानियॉ बताने लगा “महाराज जीवन कॉटन कठिन है।एक परेसानी खत्म नहीं होतो की दूसरी शरू हो जाती है।महाराज आप मुझे कुछ बताएं कैसे में आपने जीवन का निर्वाह करू?कैसे परेशानियॉ से बाहर निकलू?

यह सुन साधु महाराज हँसकर बोले “तुम मेरे साथ चलो में तुम्हे तुमारी परेशानियॉ का हल बताता हूं।

अब साधु महाराज एक दिशा की और बढे और भोला छनकर पीछे पीछे चल पड़ा।चले चले कुछ देर बाद रास्ते में एक नदी आयी।महाराज वही खड़े हो गए और भोला से बोले “में तुम्हे नदी के दूसरी और जाके तुम्हारी परेसानी का हल बताऊंगा।यह कहकर साधु महाराज वही खड़े हो गये।

बहुत देर खड़े खड़े जब बहुत देर हो गयी तब भोला आश्चर्य से बोला “महाराज हमें तो नदी पार करनी है ना?फिर हम यहाँ कब से क्यों नदी के किनारे खड़े है?हमे नदी पार करनी चाहिए।

यह सुन साधु महाराज ने कहा “में इस नदी का सूखने का इंतज़ार कर रहा हु।जब ये सुख जायेगी तब हम आराम से इस नदी को पर कर लेंगे।

भोला को साधु की बात बड़ी मुतख्तापूर्ण लगी फिर भोला बोला “महाराज नदी का पानी कैसे सुख सकता है?आप कैसी मूर्खतापूर्ण बातें कर रहे है।

यह सुन साधु महाराज हँसकर बोले “यही तो मे तुम्हे समझाना चाहता हु।नदी का पानी कभी नहीं सूखेगा।वो तो बहता ही रहता है।हमारा जीवन भी नदी की तरह है।जब तुमको पता ही की नदी का पानी नहीं सूखने वाला,तब तुमको खुद प्रयास करके नदी को पार करना होगा।वैसे ही हमारे जीवन में समशिया तो चली रहेगी,तुम्हे अपने प्रयासों से इन परेशानियों से बहार निकलना होगा।अगर तुम किनारे बैठे बैठे नदी का सूखने का इंतज़ार करते रहोगे तो जीवन भर तुम कुछ नही कर पाओगे।पानी तो बहता रहेगा परेशानियॉ तो आती रहेगी लेकिन तुम्हे अपनी कोसिसो से नदी की धार चीरते हुए आगे जाना होगा।हर एक समस्या को धरासील करना होगा।तभी तुम जीवन में कुछ कर पाओगे।”

यह सुन भोला को सारी बाते समझ में आ गयी थी।

दोस्तों,हमारी जिंदगी में भी कुछ ऐसा ही होता है।हम हमेशा सोचते है कि यह परेसानी खत्म होगी तो जीवन सूखी होगा,वह परेसानी खत्म होगा तो जीवन सुखी होगा,यह परेसानी सुलझ जाये तब जीवन सुखी होगा।लेकिन मेरे दोस्तों यह समस्या ही नदी का पानी है।नदी तो बहती रहेगी तुमको पार जाना है आपने प्रयासों से आगे बढ़ते जाइये।

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फुटा घड़ा प्रेरणादायी कहानी-Prerak Prasang

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फुटा घड़ा प्रेरणादायी कहानी (Prerak Prasang):बहुत समय पहले लोगो के घर आज की तरह पानी के नल नहीं हुवा करते थे।लोग दूर तक पैदल ही पानी भरने के लिए जाया करते थे।

ऐसे ही किसी गाँव में एक गरीब किसान रहता था।वह पानी भरने के लिए रोज सुबह उठ कर जाता और शाम को घर लोट आता था।उसका daily का routine यह था।उसके पास दो घड़े थे पर उसमे से एक घड़ा फुटा हुवा था।वह दोनों घड़ो को डंडे के किनारे पर बांध देता और आपने कंधे पर उठा कर ले जाता था।पर एक घड़ा फुटा होने के कारण घड़ा का आधा पानी रास्ते मै ही गिर जाता था पर इस बात का किसान को कभी अफसोश नहीं था।

Prerak Prasang
फुटा घड़ा प्रेरणादायी कहानी

किसान की मेहनत बेकार जाती यह देख फुटा घड़ा बड़ा उदास हो गया।और दूसरे घड़े से बोला “किसान कितनी मेहनत करता है और में उसकी सारी मेहनत ख़राब कर देता हूं।वो सुभा सुभा दूर तक पानी लेने जाता है और मेरी वजह से वह दो घड़े के पानी की जगह डेढ़ घड़ा ही पानी ला पता है।” यह कह कर वह अपने को कोसने लगा।दूसरा घड़ा बोला मे तो किसान की मेहनत को बिलकुल ख़राब नहीं होने देता।मे पूरा घड़ा पानी लाता हु।

एक दिन जब किसान सुबह घड़ा उठा कर जा रहा था तभी फुटर घड़े ने बोला “हे किसान मुझे तुम माफ़ कर दो।मे तुम्हारी मेहनत ख़राब कर देता हूं।तुम रोज मेरे में पानी भर कर लाते हो पर मेरे फूटे होने की वजह से तुम्हारा आधा पानी रास्ते में ही गिर जाता है।कृपा करके मिझे माफ़ कर दो।” और यह कह कर फुटा घड़ा उदास हो जाता है।

यह सुन किसान बोला “अरे मुझे पता है कि तुम्हारा पानी रास्ते में ही गिर जाता है।तुम्हे माफ़ी मांगने की कोई जरुरत नहीं है।तुम उदास न हो आज जब में घर लौटूंगा तब तुम उन रास्ते पर लगे हुए फूलो को देखना।”

घड़े ने ठीक ऐसा ही किया जब शाम को किसान घर लोट रहा था तब उसने रास्ते में लगे फूलो को निहारता रहा।पर वह देख रहा था कि अभी भी उसका पानी गिर रहा है।थोड़ी देर के बाद जब वह घर लौटा तो फूटा घड़ा बोला “किसान मिझे माफ़ कर दो आज फिर से मे तुम्हारे लिए पूरा घड़ा पानी नहीं ला सका।मुझे माफ़ कर दो।”

यह सुन किसान बड़ा उदास हो गया और बोला “तुमने उन फूलो को अच्छी तरह से नहीं देखा।वह सारे फूल तुम्हे ही देख कर मुस्कुरा रहे थी।क्योंकि तुम्हारी वजह से है वह फूल खिले हुए थे।तुमने ही उनको जीवनदान दिया है।मुझे पता था कि तुम्हारे घड़े में से पानी गिर जाता है इसलिए मेने रास्ते में फूल के बीज बो दिए थे।और तुम्हारे घड़े के पानी की वजह से ही वह बड़े हुए है।यह सुन घड़ा बहुत प्रसन्न हो गया।

दोस्तों,दुनिया में की कोई पूर्ण नहीं है.सबके अन्दर कुछ ना कुछ कमिय जरुर होती है.लेकिन दोस्तों अपनी कमियों को कमजोरियां ना बनने दे.ये कमिय ही इन्सान को अनोखा बनती है,ये कमिय ही है जो हमे दूसरो स अलग बनाती है.अपने अन्दर अपनी कमियों को अपनी ताकत बनाये.जय हिन्द.

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कौवे की प्रेरक कहानी-Crow Hindi Kahani

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कौवे की प्रेरक कहानी(Crow hindi kahani):एक बार एक कौवा तालाब के किनारे जा कर पानी पी रहा था।वह खुद को दुनिया का ख़ुश पक्षी समझता था।वहां पर उसने हंस को देखा और वह मन ही मन सोचने लगा “अरे वाह कितना सुन्दर पक्षी है शायद ये दुनिया का सबसे खूबसूरत पक्षी है इसलिए यह पक्षी सबसे संतुष्ठ पक्षी होगा मे नहीं।”

कौवा उसके पास गया और उसने हंस से कहा “तुम कितने सुन्दर और कितने विशाल हो।मुझे लगता है तुम्ही दुनिया के सबसे संतुष्ट पक्षी होगे?”

कौवे की प्रेरक कहानी-Crow hindi kahani
कौवे की प्रेरक कहानी-Crow Hindi Story

हंस बोला “मे भी यही सोचता था कि में दुनिया का सबसे संतुष्ट पक्षी हु जब तक मने तोते को नहीं देखा था।जब मैने तोते को देखा तो मुझे लगा की शायद यही दुनिया का सबसे संतुष्ट पक्षी होना चाहिए।क्योंकि तोते के दिन अलग अलग रंग होते है।उसकी आवाज़ भी बहुत मधुर होती है इसलिए मुझे लगता है वही सबसे संतुष्ट पक्षी होगा।”

यह सुन वह कौवा तोते के पास एक जंगल में जा पंहुचा।वह तोता पेड़ की एक टहनी पर बैठे हुए था।कौआ उसके पास गया और बोला “तोता भैया आप ही दुनिया के सबसे संतुष्ट पक्षी होना?”

तोता बोला “हाँ मुझे भी लगता था कि मे ही दुनिया का सबसे संतुष्ट पक्षी हु जब तक मैने मोर को नहीं देखा था।मोर बड़ा ही शानदार और रंग-बेरंगी पंखों वाला पक्षी है।तो मुझे लगता है वही सबसे संतुष्ट पक्षी होना चाहिए।”

यह सुन कौआ मोर के पास पहुँचा।उस ने वहा देखा की मोर को देखने के लिए हज़रो लोग आये हुए है।कौआ उसके पास गया और मोर से बोला “क्या तुम्ही दुनिया के सबसे संतुष्ट पक्षी हो?क्योंकि वाकई तुम बोहोत खूबसूरत हो।”

यह सुन मोर ने कहा “नहीं बिलकुल नहीं।मेरी इशी खूबसूरती की वजह से लोग मुझे पिंजरे में बंद कर देते है।मुझे तो कौआ ही सबसे संतुष्ट पक्षी लगता है क्योंकि वह बिना कोई रोक टोक के खुले आसमान में कही भी उड़ सकता है।इसलिए मिझे लगता है कौआ ही दुनिया का सबसे संतुष्ट पक्षी है।”

यह सुन कौआ खुस हों गया और वहा से चला गया।

दोस्तों,कौवे की तरह हम भी है हम जब दुसरो को देखते है तो हमे लगता है कि हम ही दुनिया के सबसे unlucky इंसान है इसलिए हम कभी संतुष्ट नहीं हो पाते।हमे दूसरों की ही life अच्छी और बेहतर लगाती है यही वजह है कि हमें कभी सुकून नहीं मिलता और हमेसा असंतुष्ट रहते है।दोस्तों जो आपके पास नहीं है उस पर concentrate करने की बजाय आपके पास क्या है उस पर ध्यान देंगे तो आप हमेसा सन्तुष्ट और दुनिया के सबसे खुश आदमी होंगे।

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