Hindi Prernadayak Kahaniya-में एसा क्यों हूँ

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Hindi prernadayak kahaniya(में एसा क्यों हूँ) :जंगल में एक मीठू नाम का एक तोता रहता था।एक दिन वह बड़ा उदास उदास बेठा हुआ था।बेटे  को उदास देख माने बेटे से पूछा “क्या हुआ मीठू?इतने उदास क्यों हो?”

मीठू बोला “माँ,में ऐसा क्यों हूँ?मेरी चोंच ऐसी क्यों है?में इस अटपटी चोंच से नफरत करता हूँ।”मीठू लगभग रोते हुए बोला।

माने समझाते हुये मीठू से बोला “तुम अपनी चोंच से नफरत क्यों करते हो?इतनी अच्छी तो है।

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मीठू बोला “ना।।मेरी चोंच से दुसरो की चोंच काफी अच्छी है।कौवे की,कोयल की और बाज इज सभी की चोंच मेरे से अधिक अच्छी है।पर में ऐसा क्यों हूँ?”इतना कह कर मीठू उदास होकर बेठ गया।

माँ को समझ नहीं आ रहा था।वह थोड़ी देर चुप रही और सोचने लगी की शायद मीठू सही कह रहा है।पर अब मीठू को समझाए तो कैसे? तभी माँ को ख्याल आया की क्यों न मीठू को उसके ज्ञानी मामाश्री के पास भेजे,जो जंगल के सबसे समझदार तोते है।

उसके उपरांत माने तुरंत मीठू को मामाश्री के पास भेज दिया।

मामा जंगले के बीचों बीच एक बड़े पेड़ की टहनी पर रहते थे।

मीठू उनके समक्ष जा कर बैठ गया और बोला “मामा, मेरी एक समस्या है।”

फिर मामा बोले “मेरे प्यारे बच्चे।क्या दिकत है बतावो।”

मीठू बोला “मामा मुझे अपनी चोंच बिलकुल पसंद नहीं।ये कितनी अटपटी है।यह बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती।वह मेरे दोस्त बाज, कौआ, कोयल इन सभी की चोचे कितनी अच्छी है।”

मामा बोले “बात तो तुम्हारी ठीक है।खेर तुम मिझे ये बतावो की तुम्हें खाने में केंचुये कीड़े आदि पसंद है।”

मीठू बोला “याकक।।ये सब कोई खाता है क्या? ऐसी बेकार चेझे तो मे कभी न खावु।”

मामा ने फिर से पूछा “ठीक है।।फिर तुम्हें खाने में मछलियाँ परोसे जाये?? या फिर तुन्हें ख़रगोश और चूहे परोसे जाये?”

मीठू बोला “छी।।आप कैसी बाते कर रहे है।में एक तोता हूँ,मे ये सब खाने के लिए नहीं बना।”मीठू नाराज़ होते हुये बोला।

बिलुकल सही बेटे-मामा समझाते हुए बोले “यही तो में तुम्हे समझाना चाहता हूँ।भगवानने तुम्हे कुछ अलग तरीके से बनाया है।जो तुम पसंद करते हो वो तुम्हारे दोस्तों को पसंद नहीं आयेगा और जो तुम्हारे दोस्त पसंद करते है वो तुम्हे नहीं।मान लो अगर तुम्हरी चोंच जैसी है वैसी नहीं होती हो क्या तुम अपने पसंदीदा ब्राज़ीलियन अखरोट खा पाते?…नहीं न..।इसलिए अपना जीवन यह सोचने में मत लगावो की तुम्हारे पास क्या नहीं है और दूसरों के पास क्या है..क्या नहीं।बस अपना ध्यान उन चीजों पर conectarte करो की तुम जिस गुणों के साथ पैदा हुए हो उसका सर्वश्रेष्ठ उपयोग कैसे किया जा सकता है और उसे अधिक से अधिक कैसे बढ़ाया जा सकता है।

मामाश्री की यह सब बातें सुन मीठू समझ चूका था,वह ख़ुशी ख़ुशी अपने घर लौट गया।

दोस्तों,उस तोते की तरह ही कई लोग अपने positve point को काउंट करने की बजाय दुसरो की योग्यता और उप्लधिया देख कर comparision मे लग जाते है।दोस्तों दूसरों को देख कर कुछ कर गुजरने की या उन से inspire होना एकदम अच्छी बात है पर बेकार में ईर्ष्या करना हमें disappoint ही करता है।दोस्तों हमे इस बात को समझना चाहिए की हम अपने आप मई unique है जो हमारे अंदर काबिलियत है वो शायद सामने वाले में नहीं।हर एक इंसान के अंदर एक अपनी ख़ूबी होती है।हर एक इंसान के अंदर एक अपनी काबिलियत होती है।हमारे अंदर जो ability और qualities है हम उन ही का उपयोग करके अपने जीवन को सफल बना सकते है।इसलिए हमें दुसरो को क्या मिला है उस पर concentrate करने की बजाय हमे क्या मिला है उस पर concentrate करना चाहिए।

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