मुट्ठी भर मेंढक-Hindi Short Motivational Story

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Hindi Short Motivational Story-मुट्ठी भर मेंढक हिंदी कहानी(muthi bhar mendhak hindi kahani):बहुत पुरानी बात है किसी गाँव मे एक अमित नाम जा व्यकति रहता था।वह बड़ा मेहनती और ईमानदार था।उसके अच्छे व्यवहार से कारण उसे दूर दूर के लोग उसे जानते थे और प्रसंशा भी किया करते थे।

एक रोज जब वह घर की और लोट रहा था तब उसको रास्ते में कुछ लोग दिखाई दिए।वे सभी उसी के बारे में बातें कर रहे थे।

मुट्ठी भर मेंढक-Hindi Short Motivational Story
मुट्ठी भर मेंढक-Hindi Short Motivational Story

अमित उनकी बातें सुनने के लिये बिना बताये चुपचाप उनके पीछे चलने लगा।पर अमित ने उसकी बात सुनी तो उसने पाया कि वह सब उसकी बुराई कर रहे थे।वह बातें कर रहे थे की ‘अमित बड़ा घमंडी है।’ और कोई कह रहा था कि “सब जानते है वह अच्छा होने का ढोंग करता है।

अमित ने इस से पहले बस उसकी प्रसंशा सुनी थी और इस घटना से उसके दिमाग पर गहरा असर पड़ गया।वह बड़ा उदास हो गया और जब भी किसी को उसके बारे में बातें करते देखता तब उसको बस यही लगता कि सब उसकी बुराईया कर रहे है।यहाँ तक की अगर कोई उसके सामने उसकी प्रसंशा करता तब उसको लगता कि सब उसका मजाक उड़ा रहे है।धीरे धीरे सभी को लगने लगा को अमित बदल गया है।उसकी पत्नी भी उसके पति में आये इस बदलाव से दुखी थी।

एक दिन पत्नी ने पूछा “आज कल आप इतने परेसान क्यों रहने लग गए है,मुझे बतायी शायद में आपकी कोई मदद कर सकू।”

अमित ने उदास होते हुए सारी बाते अपनी पत्नी को बताई।पत्नी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाये तभी उसको ध्यान आया की पास की गांव में एक महात्मा आये हुए है।फिर वह अपने पति से बोली “स्वामी,पास के गांव में एक सिद्ध महात्मा आये हुए है।क्यों ना हम उनके पास चल कर अपनी समस्या का समाधान पूछे।”

अगले दिन वह दोनों महात्मा के शिबिर में पहुचे।अमित में सारी बातें उस महात्मा को बताई और बोला “महाराज,उसी दिन से सभी मेरी बुराइयां करते है अब आप ही बताइये कैसे मे सबके दिलों में जगा बनावु?”

यह सब सुन महात्मा समझ चुके थे।महात्मा बोले “पुत्र तुम अपनी पत्नी को घर छोड़ आवो और आज रात तुम मेरे शिबिर में ही ठहरो।”

महात्मा के बताये अनुसार वह अपनी पत्नी को घर छोड़ आया और वही महाराज के शिबिर में ठहर गया।वह रात्रि की समय पर जब सोने के लिए गए तो अचानक से मेंढकों की टर्र -टर्र आवाज़ आने लगी।

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मोहन ने प्रसन्न किया “ये क्या महाराज यहाँ इतना कोलाहल क्यों है?”

महाराज ने उत्तर दिया “यहाँ पीछे एक छोटा सा तालाब है।रात में सोते वक़्त वह मेंढक अपना राग आलोपने लगते है।”

मोहन ने चिंता जताते हुए बोला “पर महाराज ऐसे में तो कोई सो ही नहीं सकता।”

महाराज जी बोले “हाँ बेटा, पर तुम ही बतावो हम क्या कर सकते है।हो सके तो तुम हमारी सहायता करो।”

मोहन ने उत्तर दिया “ठीक है महाराज।इतना शॉर सुनके लगता है मेंढकों की संख्या बहुत ज्यादा है।में कल ही अपने गांव जाता हूं और वह से कुछ मजदूरों को बुलाके लाता हूँ।वह सब इन्हें यहाँ से उठा कर दूसरे तालाब में छोड़ आएंगे।”

अगले दिन मोहन गांव से जाकर मजदूरों को ले कर उस तालाब के किनारे पहुँचा।महाराज भी वहा तालाब के किनारे खड़े खड़ें यह सब देख रहे थे।

तालाब ज्यादा बड़ा नहीं था बीएस 8-10 मजदूरों ने चारो और से जाला डाल कर मेंढकों को पकड़ने में लग गये।कुछ ही देर में सारे मेंढक पकड़े गए।

जब मेंढकों को बाहर निकाला गया तो मोहन ने देखा की बस 60-70 मेंढक ही है तब उसने महाराज से प्रश्न किया “महाराज कल रात तो कितना कोलाहल हो रहा था लग रहा था कि इस में हज़रो मेंढक होंगे पर यहाँ तो बस मुट्ठी भर मेंढक है।”

महाराज गभीर होते हुए बोले “बेटा।कल रात यही मेंढक थे।तुमने इन्ही की आवाज़ सुनी थी।यह मुट्ठी मेंढक की इतना शोर कर रहे थे की तुम्हे लगा की हज़ारो मेंढक टर्र टर्र कर रहे है।पुत्र,इसी प्रकार तुमने जब लोगो को तुम्हारी बुराई करते सुना तब तुमने भी यह गलती की,तुम्हे लगा की हर कोई तुम्हारी बुराई करता है पर सच यही है कि बुराई करने वाले लोग बस मुट्ठी भर ही थे। इसलिए अगली बार जब तुम्हारी बुराई करते सुन ना तो याद रखना की हो सकता है कि यह कुछ ही लोग हो जो ऐसा कर रहे हो और यह बात भी याद जरूर रखना की तुम कितने भी अच्छे क्यों ना बन जाओ पर कुछ लोग तो तुम्हारी बुराई करने वाले मिल ही जायेंगे।

यह सुन मोहन को अपनी गलती का अहसास हो चूका था वह अब पुनः पुराना वाला मोहन बन चूका था।

दोस्तों,हमे भी मोहन की तरह कुछ लोगो के व्यवहार को हर किसी का व्यवहार नहीं समझ लेना चाहिए और सकारात्मक मिजाज से अपनी जिंदगी जीनी चाहिए।हम कितने भी अच्छे क्यों न बन जाये पर आपकी बुराई करने वाले लोग मिल ही जायेंगे।और साथ में इस कहानी से यह भी सीख मिलती है कि लाइफ में कभी न कभी ऐसी समस्या आती है कि रात के अंधेरे में मनो लगाती है कि हाज़रो मेंढक कान में टर्र टर्र कर रहे हो पर जब दिन के उजाले में देखा जाता है तो पता चलता है कि ये तो बस मुट्ठी भर ही मेंढक थे।यानि की समस्या तो बस छोटी सी थी।इसलिए हमें ऐसे situation में घबराने की बजाय धैर्य से उसका solution ढूंढने का प्रयास करना चाहिए और कभी भी मुट्टी भर मेंढकों से घबराना नहीं चाहिये।

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