Nothing Is Impossible-असंभव कुछ भी नहीं हिंदी प्रेरनादायी कहानी

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2001
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असंभव कुछ भी नहीं हिंदी कहानी -Nothing is Impossible:किसी राज्य में एक राजा था।उस राजा के दो पुत्र थे-अमित औऱ विक्रम।दोनों भाई एक दूसरे से बहुत लगाव रखते थे।एक दिन दोनों जंगल में शिकार करने गए।रास्ते में चलते चलते एक नदी आयी।दोनों राजकुमारों का मन हुआ की चलो इस नदी में नहाया जाये।

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फिर वह दोनों नदी के अंदर उतर गए।नदी उनकी अपेक्षा से काफी गहरी थी।अमित तैरते तैरते कुछ दूर तक निकल गया।अभी थोड़ा तैरना शरू ही किया था कि एक जोर की पानी की लहर आयी और अमित को अपने साथ दूर तक ले गयी।अमित डर से अपनी सुध बुद खो बैठा।गहरे पानी में उससे तैरा नहीं जा रहा था।अब तो वह डूबने लगा था।

Nothing Is Impossible असंभव कुछ भी नहीं हिंदी प्रेरनादायी कहानी
Nothing Is Impossible असंभव कुछ भी नहीं हिंदी प्रेरनादायी कहानी

अपने भाई को बुरी तरह फसा देख विक्रम जल्दी से पानी के बहार निकला।और जल्दी से एक लकड़ी का गट्ठा अमित की और उछाला।परंतु दुर्भाग्यवा अमित इतना दूर था कि लकड़ी का गट्ठा उसके हाथ नहीं आ रहा था।

अब तो विक्रम परेसान हो उठा।कुछ देर बाद कुछ गांव वाले वह पहुचे और राजकुमार को देख सभी बोलने लगे “अब तो राजकुमार को बचाना नामुमकिन है।अब राजकुमार नहीं बच पायंगे।”यह सुन अब विक्रम को भी लगने लगा था अब उसका भाई अमित नहीं बच सकता।तेज बहाव में बचना नामुमकिन है ऐसा सोच कर सभी ने अपने हथियार डाल दिये और कोई बचाव के लिए आगे नहीं आया।

अभी सभी लोग नदी के किनारे बैठ अमित का शोक मन राहर थे तभी उनको दूर से एक सन्यासी आते हुए नज़र आये।साथ में एक नोजवान भी दिखाई दे रहा था।पास आये तो पता चला की वो अमित था।अब तो सब खुश हो गए और सब अच्चार्यचकित हो उठे।सब बड़े ही आश्चर्य से अमित से पूछने लगे अरे तुम इतने तेज बहाव में बचे कैसे?

यह सुन सन्यासी बोले-“आपके इस सवाल का जवाब में देता हूं।वह बच पाया क्योंकि उसे वह यह कहने वाला नहीं था कि यहाँ से बचना नामुमकिन है,इसे कोई हतास करने वाला नहीं था।इशके सामने तो बस लकड़ी के वो गट्ठर था और बचने की एक उमीद बीएस इसलिए ये बच निकला।

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दोस्ती,हमारे साथ भी ऐसा ही होता है।जब कोई कहने लगता है कि यह असम्भव है तब हम भी अपने हथियार डाल देते है क्योंकि हम भी मन लेते है कि यह असंभव है।हम अपनी क्षमताओ का आकलन दुसरो के कहने से करते है।जैसे की कभी कोई टोपर किसी exam में फ़ैल हो जाता है तब हम ऐसी बाते करते है:-

अरे जब टोपर छात्र से पेपर नहीं निकला तो हम कैसे निकालेंगे।
कोई बोलता है अरे इतना आसान नहीं है जितना तुम समझ रहे हो।
कोई बोलता है ये तुम्हारे बीएस की बात नहीं।
ये exam तो इतना कठिन है कि अच्छे अच्छे लोग इसे पार नहीं कर सकते तुम क्या पार करोगे।

और ये सब बातें सुन कर और देखकर हम अपने खुद की skill का उपयोग ही नहीं कर पाते।हम मन लेते है कि हम नहीं कर सकते।दोस्तों इस कहानी का तात्पर्य है कि आपके अंदर अपार क्षमताये है,किसी के कहने से आपने आपको कमजोर मत मानिये।

सोचिये अगर कोई विक्रम से यह बात बार बार कहता तुम यहाँ से नहीं निकल सकते,यहाँ से निकलना नामुमकिन है,ये अस्मम्भव है तो क्या वह निकल पता?कभी नहीं मेरे दोस्तों,उसने खुद पर विस्वास रखा खुद पे उमीद थी बस उसी उमीद से वह बच पाया।

 

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